पांच माह तक नहीं होंगे बूढ़ी नागिन के दर्शन

कुल्लू। ऐतिहासिक धार्मिक स्थल सरयोलसर में माता बूढ़ी नागिन मंदिर के कपाट मार्गशीर्ष संक्रांति से बंद हो जाएंगे। समुद्रतल से करीब 11 हजार फीट ऊंचे इस पर्यटन और धार्मिक स्थल सरयोलसर में वास करने वाली अधिष्ठात्री माता बूढ़ी नागिन के दर्शन अगले पांच माह तक नहीं हो पाएंगे। सरयोलसर मंदिर कमेटी प्रधान मोहर सिंह तथा माता के कारदार भागे राम राणा ने यह जानकारी दी है। बताया कि हर साल की तरह इस वर्ष भी माता बूढ़ी नागिन के मंदिर के कपाट 16 नवंबर से बंद कर दिए जाएंगे। अब अप्रैल तक माता क ी पूजा अर्चना भी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि माता की वास स्थली अधिक ऊंचाई पर होने से यहां ठंड का प्रकोप अधिक बढ़ गया है तथा यहां श्रद्धालुओं का आना किसी खतरे से खाली नहीं है। जाड़े के दिनों हाड़ कंपा देने वाली ठंड के चलते देवी बूढ़ी नागिन के पुजारी व कारदार यहां नहीं रहेंगे। जाड़े के मौसम में यहां भारी हिमपात होने से माता बूढ़ी नागिन की पवित्र झील भी पांच माह तक बर्फ के आगोश में समा जाएगी। एक किलोमीटर की परिधि में बनी माता की यह पवित्र झील देशी और विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहती है। अधिक ऊंचाई होने से पवित्र झील के दर्शन अब अप्रैल तक नहीं हो पाएंगे। माता के कारदार भागे राम राणा ने बताया कि माता का मंदिर और झील पर सर्दियों के दिनों अमूमन 10-15 फीट बर्फ गिरती आई है। ऐसे में मंदिर कमेटी हर वर्ष माता के मंदिर को बंद कर देती है। उधर, मां के भक्त लीला प्रसाद, तेज राम, लाल चंद ठाकुर, सुरेश कुमार, डीएन कश्यप ने कहा कि सरयोलसर में इन दिनों ठंड बढ़ गई है, ऐसे में अब भक्तों का यहां पहुंचना आसान नहीं है।
जलोड़ी दर्रा तथा माता बूढ़ी नागिन की वास स्थली सरयोलसर में ठंड का प्रकोप धीरे-धीरे बढ़ने लगा है। सुबह-शाम यहां के नालों का पानी भी जमने लगा है।
भाग चंद पुलिस बचाव चौकी जलोड़ी दर्रा

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